प्रेम vs मोह
4.6.2015
प्रश्न: सर, किशोरावस्था के साथ मिलने वाला प्यार सच्चा प्यार नहीं है। वह मोह है। क्या इसकी अनुमति देना अच्छा है?
उत्तर: प्रेम ही एकमात्र सत्य है। यह किसी भी उम्र में सच है और इसे गलत नहीं ठहराया जा सकता। यह अल्पकालिक हो सकता है, लेकिन स्वाद समान है। कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप समुद्र का पानी लेते हैं, स्वाद एक ही रहता है। लेकिन समुद्र की समझ बदल जाती है।
यदि आप समुद्र तट पर खड़े हैं, तो आप केवल समुद्र की लहरों को देखेंगे। यदि आप समुद्र में गहराई से जाते हैं, तो आप समुद्र की शांति देखेंगे। मोह और वासना प्रेम के सागर की सतह की तरह हैं। सतह पर, लहरें होंगी। लेकिन सतह को पार किए बिना आप गहरे कैसे जा सकते हैं?
हमारा शरीर यह सतह है, जो प्रेम का प्रवेश द्वार है। यदि आप सतह की निंदा करते हैं और प्रवेश द्वार को बंद करते हैं, तो आप गहराई तक कैसे जा सकते हैं? आप किसी व्यक्ति के शरीर को प्यार किए बिना कैसे प्यार कर सकते हैं? एक व्यक्ति शरीर, मन और आत्मा का एक संयोजन है। बिना शरीर वाला आदमी शैतान है।
आत्मा का ठोस रूप शरीर है। शरीर का द्रव रूप आत्मा है। शरीर परिधि और आत्मा केंद्र। परिधि के माध्यम से ही केंद्र में जाना संभव है। प्रवेश द्वार को बंद करना, सतह की निंदा करना और अपराधबोध पैदा करना समाधान नहीं है। समाधान यह है कि गहराई तक जाने के लिए माहौल बनाया जाए।
प्रेम मानसिक परिपक्वता है। यदि आप इसे जल्दी रोकते हैं, तो आपका पूरा जीवन दुखी होगा। प्यार जितना गहरा होता है, उतना ही परिपक्वता बढ़ता है। परिपक्वता जितना बढ़ता है, उतना ही दुख कम होते जाते हैं।
सुप्रभात ..... प्यार में परिपक्व हो ... 💐
वेंकटेश - बैंगलोर
(9342209728)
यशस्वी भव

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